8 April 2026 Current Affairs in Hindi
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विषय: बुनियादी ढांचा और ऊर्जा
1. भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 में पवन ऊर्जा क्षमता में अब तक की सबसे अधिक 6.05 गीगावाट की वृद्धि दर्ज की।
- यह पिछले रिकॉर्ड (वित्त वर्ष 2016-17 में 5.5 गीगावाट की वृद्धि) को पार कर गया है।
- यह नई वृद्धि वित्त वर्ष 2024-25 की तुलना में लगभग 46% की तीव्र वृद्धि दर्शाती है।
- यह उछाल तटवर्ती पवन ऊर्जा के विकास में तीव्र गति का संकेत देता है।
- भारत की कुल स्थापित पवन ऊर्जा क्षमता अब 56 गीगावाट से अधिक हो गई है।
- यह उपलब्धि पवन ऊर्जा क्षेत्र में हुई नई प्रगति को दर्शाती है।
- इस विस्तार में बेहतर नीतिगत समर्थन ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
- बेहतर पारेषण अवसंरचना ने भी इसके तीव्र कार्यान्वयन को सुगम बनाया है।
- प्रतिस्पर्धी टैरिफ व्यवस्थाओं ने इस क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा दिया है।
- गुजरात, कर्नाटक और महाराष्ट्र जैसे राज्यों ने इस प्रयास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
- पवन और सौर ऊर्जा को संयोजित करने वाली हाइब्रिड परियोजनाएं भी गति पकड़ रही हैं।
- भारत पवन ऊर्जा के लिए विश्व के अग्रणी बाजारों में से एक के रूप में उभरा है। सरकार ने इस क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए कई उपाय किए हैं।
- इनमें पवन टरबाइन घटकों पर सीमा शुल्क में कमी शामिल है।
- अंतर-राज्यीय पारेषण शुल्क में छूट को भी 2028 तक बढ़ा दिया गया है।
- राष्ट्रीय पवन ऊर्जा संस्थान द्वारा तकनीकी सहायता प्रदान की जाती है।
- यह विस्तार 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन ऊर्जा के राष्ट्रीय लक्ष्य को प्राप्त करने में योगदान देता है।
विषय: शिखर सम्मेलन/सम्मेलन/बैठकें
2. त्रि-सेवा संगोष्ठी 'रण संवाद' का आयोजन बहु-क्षेत्रीय युद्ध रणनीतियों पर किया जाएगा।
- त्रि-सेवा संगोष्ठी 'रण संवाद' का आयोजन 9-10 अप्रैल, 2026 को बेंगलुरु स्थित वायु सेना प्रशिक्षण कमान में किया जाएगा।
- इस आयोजन को युद्ध के विकसित होते प्रतिमानों पर संवाद के लिए एक संरचित मंच के रूप में परिकल्पित किया गया है।
- इस संस्करण के लिए "बहु-क्षेत्रीय अभियान: पारंपरिक और अनियमित खतरों से निपटने की अनिवार्यता" विषय चुना गया है।
- विचार-विमर्श का केंद्र बिंदु भारत के रक्षा बलों को थल, वायु, समुद्र, साइबर, अंतरिक्ष और संज्ञानात्मक क्षेत्रों में फैले संघर्षों के लिए तैयार करना होगा।
- प्रमुख चर्चाओं में बहु-क्षेत्रीय अभियानों का विकास और आधुनिक युद्धक्षेत्रों को प्रभावित करने वाले वैश्विक रुझान शामिल होंगे।
- रक्षा तैयारियों के लिए राष्ट्रीय संसाधनों का लाभ उठाने वाले समग्र राष्ट्र दृष्टिकोण की अवधारणा पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा।
- प्रभावी कमान एवं नियंत्रण के लिए सैद्धांतिक अनुकूलन, प्रशिक्षण और परिचालन रणनीतियों की पुनर्कल्पना पर जोर दिया जाएगा।
- यह संगोष्ठी बहु-क्षेत्रीय अभियानों के ढांचे के भीतर नागरिक-सैन्य एकीकरण की जानकारी भी प्रदान करेगी।
- रक्षा पेशेवरों के बीच रणनीतिक संवाद को बढ़ावा देने के लिए अनिल चौहान द्वारा इस पहल की परिकल्पना की गई थी।
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